Sunday, February 12, 2017

साँसे और आध्यात्मिकता ( management of breathing power ) part 2

dont mortgage your breathing
ऊर्जा को अधिक से अधिक ग्रहण करने के लिए साँसों के साधन को किस तरह उपयोग में  लाया जा सकता है ? यह जानना आसान है और इसके प्रयोग भी आसान है | बस आपको दो चीजों का विशेष ध्यान रखना है –
 १- आराम से करना है ..कोई जल्दबाजी कोई हड़बड़ी नहीं करनी |  एकदम नेचुरल तरीके से करना है | 
२- आँखे बंद करके थोड़े समय के लिए ही करना है ..2 min.  से 10 min. के लिए उससे ज्यादा नहीं |
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तो आपको करना क्या है ? आपको बस अपनी breathing cycle को बढ़ा देना है यानी अपनी सांसों को गहरी करना है | कैसे ???
१- अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें | जैसे ही आप ध्यान केंद्रित करेंगे यह खुद ब खुद गहरी होती जाएंगी| बस आप अपनी सांसों के प्रति aware हो जाए | यह आसान है | ऐसा आप कभी भी कर सकते हैं -- खाना पकाते समय , कार धोते समय , कपड़े धोते समय, नाश्ता करते समय, किसी का इंतजार करते समय.. अर्थात कोई भी कार्य करते समय आप जैसे - जैसे अपनी सांसों की प्रति अवेयर होती जाएंगे वैसे -वैसे यह और भी गहरी होती जाएंगी|

२- रेचक पूरक और कुंभक के समय को थोड़ा बढ़ाने की कोशिश करें |

३- प्राणायाम ,योगाभ्यास ,exercise से भी आपकी साँसों की अवधि बढती है | उनका अभ्यास करें |
साँसों के कुछ प्रयोग
सबसे पहले शरीर में उपस्थित  सातों major चक्रों की स्थति जान ले |
 आँखे बंद करें और सहस्त्र्सार चक्र से शुरू करते हुए मूलाधार चक्र तक एक एक करके सातों चक्र पर ध्यान केन्द्रित करें और प्रत्येक चक्र तक ४ बार breath करें ऐसा अनुभव करें कि आप प्रत्येक  चक्र को साँसों के माध्यम से ब्रह्मांडीय ऊर्जा पहुंचा रहे हैं | जब आप मूलाधार तक आ जाएँ यानी के ऊपर के चक्र से नीचे के चक्र में आ जाये तब मूलाधार से सह्त्रसार चक्र तक फिर से प्रत्येक चक्र को ३- ३ बार breath दें | यानी आपको एक बार सह्त्रसार से मूलाधार फिर मूलाधार से सह्स्त्रसार तक जाना है |
भौतिक आँखे बंद होने पर तीसरी आँख या आपका आज्ञा चक्र तुरंत ही हरकत में आते है.. परिणाम स्वरुप अभ्यास बढ़ने पर आपको कुछ कलर दिख सकते है  जैसे सफ़ेद हरा लाल पीला ये सभी चक्रों के ही रंग है | जो रंग दिखे अर्थात वो चक्र जागृत है जिस चक्र का रंग ना दिखे अर्थात उस चक्र में ऊर्जा की कमी है या फिर वो चक्र जागृत नहीं है |
इस प्रयोग का उद्धेश्य सामान रूप से सभी चक्रो की ऊर्जा को जागृत करना है |
आँखे बंद करें |
साँसों को सामान्य गति में चलने दे | अपना सारा ध्यान उस जगह पर केन्द्रित करें जंहा पर रोग है अथवा जिस अंग पर रोग है अगर आपको कई जगह दर्द है और आप exact locate नहीं कर पा रहें कि आपके दर्द का सोर्स किस जगह  पर है | तो अपने शरीर को आदेश दीजिये कि वो आपकी सहायता करे ( आपने , आपकी आत्मा ने शरीर धारण किया है शरीर ने आत्मा नहीं धारण  नही किया सो आप जो भी कहोगे शरीर को वो सुनना पड़ेगा ) आपको महसूस होगा , कुछ ही पल में ...कि दर्द किस जगह  है | उस जगह को टारगेट करे और साँसों के माध्यम से ब्रह्मांडीय ऊर्जा को वंहा भेजे | जैसे जसे अभ्यास बढ़ता जाएगा वैसे वैसे आराम मिलता जायेगा |
शांत बैठ जाएं , आंखें बंद कर ले | अब आपको अपने तनाव को शून्य से लेकर पच्चीस के भीतर संख्या देनी है | ठीक उसी तरह जैसे  एग्जाम में आपको हंड्रेड में से मार्क्स मिलते हैं | उसी प्रकार आपको अपने तनाव को 25 में से  मार्क्स देने हैं | जैसे अगर बहुत तनाव है तो 25 , मध्यम है तो 12 और उससे भी कम है तो 12 से भी कम फिर मन ही मन यह दृढ़ निश्चय करें कि हर रेचक  के साथ आप तनाव को शरीर व मन से बाहर भेज रहे हैं |अब घटती  हुई संख्या में गिनती गिनते जाए | रेचक व पूरक  करते जाएं और प्रत्येक रेचक के साथ , तनाव को शरीरमन से बाहर  करते जाएं | ध्यान रखे - यह प्रयोग बहुत ही आराम से करें | तनाव को बाहर करने के लिए सांसों पर तनाव ना दें | सामान्यता रेचक के अवधि पूरक से अधिक होती है लेकिन जब आप यह प्रयोग करेंगे तब आप पाएंगे कि रेचक की अवधि पूरक से पहले से  भी ज्यादा अधिक या लगभग डबल हो गई है | शून्य ता आते आते आप स्वयं को  पूरी तरह तनावमुक्तमहसूस करेंगे |

अगर आपके घुटनों में दर्द है या सिर दर्द है , कमर दर्द है या कोई अन्य दर्द है तो स्वयं को एकाग्र करें अर्थार्थ आंखे बंद करें शांत हो जाएं और आराम से सांसे ले उसके बाद अपना ध्यान उस जगह पर केंद्रित करें जहां पर दर्द है यदि आप अपने शरीर से पूछेंगे | तो वह आपको भावनाओं के माध्यम से यह भी बताएगा कि वह कौन से सटीक जगह है | जो दर्द का स्रोत है | अपने ध्यान को वहां पर केंद्रित करें और अपनी सांसों के द्वारा आती हुई ब्रम्हांडीय शक्ति को उस जगह पर भेजिए जैसे जैसे आप का अभ्यास बढ़ता जाएगा वैसे वैसे आपका दर्द कम होता जाएगा | धीरे-धीरे आपका दर्द कम होता जाएगा| आप उस दर्द को बाहर जाती हुई सांसों के साथ शरीर से बाहर भी कर सकते हैं |

आपके क्या विचार है क्या साँसे लेना और छोड़ना बस एक सामान्य सी घटना है ???क्या आप इसका उत्तर देना पसंद करेंगे | भाग दो में साँसों से जुड़े कुछ प्रयोगों के बारे में बातें करेंगे | अपनी राय और जानकारियाँ हमसे ज़रूर शेयर करे |